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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् ।

स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वांगमयं तप उच्यते ॥15॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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